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छात्रों का आरोप: पैसे न देने पर किया गया फेल!

ब्रेकिंग न्यूज़ सिंगरौली ब्यूरो चीफ दिनेश तिवारी,

छात्रों का आरोप: पैसे न देने पर किया गया फेल!


सिंगरौली के शासकीय स्कूल में छात्रों का बड़ा खुलासा, ₹500 से ₹1000 की मांग का आरोप, जांच की मांग तेज

मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मकरोहर के छात्रों ने आरोप लगाया है कि परीक्षा में पास होने के लिए उनसे पैसे मांगे गए, और पैसे न देने पर उन्हें जानबूझकर फेल कर दिया गया।
यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, और छात्र न्याय की मांग को लेकर सामने आए हैं।

 

पूरी खबर:
सिंगरौली जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मकरोहर के कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों ने स्कूल प्रबंधन और कुछ शिक्षकों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के दौरान उनसे ₹500 से ₹1000 तक की मांग की गई थी।
छात्रों के अनुसार, यह रकम परीक्षा में पास कराने के नाम पर मांगी गई थी। जिन छात्रों ने पैसे देने से इनकार किया, उन्हें कथित तौर पर कम अंक देकर फेल कर दिया गया।

 

छात्रों का कहना है:
“हम गरीब परिवार से आते हैं। हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम किसी को दे सकें। हमने ईमानदारी से परीक्षा दी, लेकिन हमें जानबूझकर कम नंबर देकर फेल कर दिया गया।”
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं किया गया। कई छात्रों का दावा है कि उन्होंने परीक्षा में अच्छे उत्तर लिखे थे, लेकिन रिजल्ट में उन्हें बेहद कम अंक दिए गए।

गंभीर आरोप:
छात्रों का आरोप है कि स्कूल के प्रभारी और कुछ शिक्षकों की मिलीभगत से यह पूरा मामला हुआ है। उनका कहना है कि जिन छात्रों ने पैसे दिए, उन्हें पास कर दिया गया, जबकि बाकी छात्रों को फेल कर दिया गया।
इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्रों की मांग:
इस मामले में पीड़ित छात्रों ने सामूहिक रूप से आवेदन देकर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। छात्रों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच (रीचेकिंग) कराई जाए

पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए

दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो

भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं

 

सामूहिक आवेदन:
बताया जा रहा है कि कई छात्रों ने मिलकर इस मामले को लेकर लिखित आवेदन दिया है। इस आवेदन में उन्होंने अपनी पूरी स्थिति को विस्तार से बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो उनका भविष्य अंधकार में चला जाएगा।

 

बड़ा सवाल:
यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़ा करता है।
👉 क्या शिक्षा के मंदिर में अब भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो रही हैं?

👉 क्या गरीब छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है?

 

क्या अंक और परिणाम भी अब पैसों के आधार पर तय हो रहे हैं?
अगर छात्रों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि शिक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ भी है।

 

प्रशासन की भूमिका:
अब इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। छात्रों और उनके अभिभावकों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कराएगा।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

निष्कर्ष:
सिंगरौली से सामने आया यह मामला शिक्षा व्यवस्था की साख पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न केवल अनैतिक है, बल्कि यह समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि क्या छात्रों को न्याय मिल पाता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

ब्रेकिंग न्यूज़ सिंगरौली ब्यूरो चीफ दिनेश तिवारी,

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