
खास रिपोर्ट | पटना से मुकेश रंजन सिन्हा
पटना से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सार्थक माइक्रो फाइनेंस कंपनी पर गरीब और लाचार महिलाओं का आर्थिक शोषण करने के गंभीर आरोप लगे हैं। जानकारी के अनुसार, यह कंपनी महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ₹10,000 से ₹15,000 तक की राशि तो देती है, लेकिन इसके बदले प्रतिदिन ₹100 से ₹150 तक की वसूली 120 दिनों तक करती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यदि किसी महिला के परिवार में कोई आपात स्थिति, बीमारी या मृत्यु हो जाती है, तो कंपनी द्वारा राहत देने के बजाय प्रतिदिन ₹100 का अतिरिक्त दंड शुल्क लगाया जाता है। कई पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे जरूरत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि जिन महिलाओं ने ₹15,000 का लोन लिया था, उनके ऊपर दंड और ब्याज मिलाकर ₹30,000 से ₹38,000 तक की वसूली की जा रही है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई है और कई महिलाएं मानसिक तनाव में हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कंपनी के पास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कोई स्पष्ट मान्यता नहीं है, फिर भी यह खुलेआम अपना कारोबार चला रही है। कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वे जवाब देने से बचते नजर आए।
इस मामले में प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग उठने लगी है, ताकि गरीब महिलाओं को राहत मिल सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।




