25 KM दूर वोट, जामडीह में लोकतंत्र बना मजबूरी

अनूप कुमार की रिपोर्ट
महुआडांड़ प्रखंड के ओरसा पंचायत अंतर्गत जामडीह का मामला है हर वोट जरूरी है का नारा यहां पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। करीब 1000 मतदाताओं वाला जामडीह गांव आज भी अपने ही अधिकार से जूझ रहा है। ग्रामीणों को वोट देने के लिए 20 से 25 किलोमीटर तक जाना पड़ता है, जो किसी सजा से कम नहीं है।यह सिर्फ दूरी नहीं, बल्कि सिस्टम की सीधी नाकामी है। बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग मतदाता इस लंबी दूरी के कारण मतदान से दूर रह जाते हैं। कई लोग चाहकर भी वोट नहीं दे पाते, क्योंकि न साधन है, न सुविधा।सबसे हैरानी की बात यह है कि यह समस्या नई नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और प्रशासन आंखें मूंदे बैठे हैं। कागजों में व्यवस्था पूरी दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में लोकतंत्र दम तोड़ता नजर आता है।ग्रामीणों का दर्द अब सवाल बन चुका है—जब वोट देने के लिए 25 किलोमीटर चलना पड़े, तो यह अधिकार नहीं, बल्कि मजबूरी बन जाता है।जामडीह की यह तस्वीर साफ बताती है कि यहां लोकतंत्र नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही हावी है।




