
महुआडांड़ में पानी के लिए हाहाकार: 44 करोड़ की जलापूर्ति योजना फेल, मंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं टपका पानी
महुआडांड़ (लातेहार) — भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही महुआडांड़ प्रखंड में पेयजल संकट गहरा गया है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई लोध ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। वर्ष 2018-19 में शुरू हुई और वर्ष 2021 में पूर्ण हुई इस योजना का उद्घाटन भी कर दिया गया, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ है। इससे विभागीय कार्यशैली, जनप्रतिनिधियों और सरकार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
44 करोड़ खर्च, फिर भी सूखे नल
महुआडांड़ प्रखंड के शहरी क्षेत्र सहित 7 पंचायतों के 38 गांवों में पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से लगभग 44 करोड़ रुपये की लागत से लोध ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत लगभग 7000 घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर मशीनें लगाई गईं, पाइपलाइन बिछाई गई, जलमीनार बनाए गए और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया। यहां तक कि प्लांट संचालन के लिए ऑपरेटरों की नियुक्ति भी कर दी गई और उन्हें नियमित भुगतान भी किया जा रहा है।लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज तक एक भी गांव में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
उद्घाटन के बाद ठप पड़ी योजना
महुआडांड़ प्रखंड में इस योजना का उद्घाटन 20 दिसंबर 2021 को सांसद सुनील कुमार सिंह और विधायक रामचंद्र सिंह द्वारा किया गया था। मार्च 2022 तक विभाग ने कई बार ट्रायल भी किया, लेकिन उसके बाद योजना ठप पड़ गई।ग्रामीणों का आरोप है कि उद्घाटन केवल औपचारिकता बनकर रह गया और उसके बाद योजना की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
पाइपलाइन बिछी, लेकिन पानी का नसीब नही ग्रामीणों को
ग्रामीणों ने बताया कि जब भी पानी की सप्लाई शुरू की जाती है, कई जगहों पर पाइपलाइन फट जाती है और पानी घरों तक पहुंचने के बजाय सड़कों पर बहने लगता है।मरम्मत के लिए मिस्त्रियों को भेजा गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। इसके बाद दोबारा कोई अधिकारी या टीम समस्या देखने नहीं पहुंची।इससे साफ है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
बिजली का बहाना, विभाग पर उठे सवाल
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का कहना है कि नियमित जलापूर्ति के लिए प्रतिदिन 8 घंटे बिजली की आवश्यकता है, लेकिन 4 घंटे भी बिजली सुचारू रूप से नहीं मिल पा रही है। इसी कारण जलापूर्ति शुरू नहीं हो पा रही है।लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर योजना बनाने से पहले बिजली की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? उद्घाटन से पहले योजना पूरी तरह चालू क्यों नहीं की गई?
लोगों का आरोप है कि विभाग अपनी लापरवाही छिपाने के लिए बिजली का बहाना बना रहा है।
7000 घरों को मिलना था लाभ, लोग चुआड़ी पर निर्भर
इस योजना से महुआडांड़ प्रखंड के चटकपुर, चंपा, ऑक्सी, हामी, चैनपुर, रेगाई, अंबाटोली सहित 38 गांवों के लगभग 7000 घरों को स्वच्छ पेयजल मिलना था।लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि ग्रामीण आज भी झरनों, नदी और चुआड़ी के पानी पर निर्भर हैं। गर्मी बढ़ने के साथ जल संकट और गहराता जा रहा है।
तीन जलमीनार और 5.10 एमएलडी का प्लांट भी बेकार
लोध ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना के तहत बूढ़ा नदी में इनटेक वेल बनाया गया है। यहां से पानी मिरगी गांव में बने 5.10 एमएलडी क्षमता के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में लाया जाना है।इसके बाद पानी को फिल्टर कर तीन जलमीनारों में भेजा जाना है —
मेढ़ारी जलमीनार – 5.84 लाख लीटर
मेराम जलमीनार – 4.05 लाख लीटर
महुआडांड़ जलमीनार – 3.9 लाख लीटर
साथ ही महुआडांड़ में 3 लाख लीटर क्षमता का सम्प भी बनाया गया है।लेकिन करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए ये सभी संसाधन वर्तमान में बेकार पड़े हुए हैं।
1200 चापाकल में 100 से अधिक खराब
प्रखंड में लगभग 1200 चापाकल मौजूद हैं, जिनमें 100 से अधिक खराब पड़े हैं। इससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
आधी आबादी चुआड़ी पर निर्भर
महुआडांड़ प्रखंड की लगभग सवा लाख आबादी में से आधी आबादी चुआड़ी और नदी के पानी पर निर्भर है।70 से 80 गांवों में जलापूर्ति नहीं हो रही है। कई जलमीनार भी खराब पड़े हैं। इससे जल संकट लगातार गहराता जा रहा है।
मंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं शुरू हुई योजना
झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने योजना जल्द चालू करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक योजना शुरू नहीं हो सकी है।ग्रामीणों का कहना है कि मंत्री के आश्वासन के बाद भी कार्रवाई नहीं होना सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
बिना पानी के बिल का डर
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि बिजली की तरह पानी का भी बिल बिना सप्लाई के देना पड़ सकता है। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।




