
लातेहार के जंगलों में महुआ की बहार, ग्रामीणों के लिए बना ‘प्राकृतिक एटीएम’: तारा साहू
लातेहार जिले में इन दिनों महुआ का मौसम ग्रामीणों के लिए खुशहाली लेकर आया है। चंदवा, बालूमाथ, मनिका, गारू, बरवाडीह, बरियातू, हेरहंज और सरयू महुआडांड़ प्रखंड के जंगलों में महुआ के पेड़ फूलों से लदे हुए हैं। पेड़ों से गिरते महुआ के फूलों को सुबह-सुबह ग्रामीण इकट्ठा कर बाजार में बेच रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है।
महुआ का सीजन आते ही गांवों में रौनक बढ़ जाती है। सुबह होते ही पुरुष, महिलाएं और बच्चे टोकरी और बोरी लेकर जंगलों की ओर निकल पड़ते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महुआ उनके लिए साल का सबसे बड़ा सहारा है। एक अच्छे महुआ के पेड़ से एक सीजन में 10 हजार से 20 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है। जिन परिवारों के पास अधिक पेड़ हैं, उनकी आय भी बढ़ जाती है।महुआ संग्रहण में महिलाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। महिलाएं समूह बनाकर महुआ चुनती हैं और स्थानीय बाजारों में बेचती हैं। कई जगहों पर स्वयं सहायता समूह महुआ से अचार, बिस्किट और अन्य उत्पाद तैयार कर बेहतर कीमत पर बेच रहे हैं।इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता तारा साहू ने कहा कि लातेहार जैसे वन क्षेत्रों में महुआ ग्रामीणों के लिए रोजगार का बड़ा साधन है। उन्होंने कहा, “जिले में रोजगार के अवसर सीमित हैं, ऐसे में महुआ ग्रामीणों के लिए आय का मजबूत जरिया बन रहा है। यदि सरकार महुआ के संग्रहण, भंडारण और उचित मूल्य की व्यवस्था करे, तो इससे हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति और बेहतर हो सकती है।”
महुआ का उपयोग खाद्य पदार्थ, पेय, तेल और अन्य उत्पादों में किया जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि महुआ का संरक्षण और सही बाजार व्यवस्था होने से यह जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत कर सकता है




