महुआडांड़ में पेयजल व्यवस्था फेल, मिस्त्री की भारी कमी से ठप पड़ी जलमिनार मरम्मत, विभाग पर लीपापोती का आरोप
अनूप कुमार की रिपोर्ट

महुआडांड़ में पेयजल व्यवस्था फेल, मिस्त्री की भारी कमी से ठप पड़ी जलमिनार मरम्मत, विभाग पर लीपापोती का आरोप
महुआडांड़ प्रखंड में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। प्रखंड क्षेत्र में खराब पड़े जलमिनार और चापाकलों की मरम्मत समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मिस्त्रियों की भारी कमी के कारण मरम्मत कार्य ठप पड़ा हुआ है और लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग केवल खानापूर्ति और कागजी कार्रवाई तक सीमित है।जमीनी स्तर पर खराब पड़े जलमिनार और चापाकलों को ठीक करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कई गांवों में जलमिनार महीनों से खराब पड़े हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है महुआडांड़ प्रखंड में कुल 14 पंचायत और लगभग 50 गांव शामिल हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र में मरम्मत के लिए मिस्त्रियों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में पूरे प्रखंड में समय पर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करना विभाग के लिए चुनौती बन गया हैग्रामीणों ने बताया कि पीएचडी विभाग द्वारा पहले दावा किया गया था कि गर्मी के मौसम में पेयजल संकट नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन वर्तमान हालात विभागीय दावों की पोल खोल रहे हैं। कई गांवों में लोग दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं, वहीं कुछ जगहों पर हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं।गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ने की आशंका है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त मिस्त्री की नियुक्ति करने और खराब जलमिनार व चापाकलों को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है।यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में महुआडांड़ प्रखंड में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।




