झारखंड

न सड़क, न दुकान, न एंबुलेंस — बीमार को खाट पर ढोते हैं ग्रामीण, शादी के रिश्ते भी टूटे

सिस्टम की नाकामी: महुआडांड़ का जामडीह 78 साल बाद भी सड़क से वंचित

अनूप कुमार की रिपोर्ट

महुआडांड़ (लातेहार) झारखंड
राज्य में गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच महुआडांड़ प्रखंड के ओरसा पंचायत का जामडीह गांव एक ऐसी सच्चाई सामने ला रहा है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आजादी के 78 साल बाद भी इस गांव में एक भी पक्की सड़क नहीं बनी।गांव तक पहुंचने के लिए केवल कच्चे और खतरनाक रास्ते हैं। बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कीचड़ और पानी से रास्ते बंद हो जाते हैं और पूरा गांव टापू बन जाता है। कई दिनों तक गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है।

गांव में एक भी दुकान नहीं

जामडीह की हालत इतनी खराब है कि यहां एक भी दुकान नहीं है। नमक, तेल, दवा जैसी छोटी जरूरतों के लिए भी ग्रामीणों को 25 से 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

सड़क नहीं, इसलिए टूट रहे शादी के रिश्ते

ग्रामीणों का कहना है कि गांव की बदहाल स्थिति के कारण सैकड़ों शादी के रिश्ते टूट चुके हैं। लोग इस गांव में अपनी बेटियों की शादी करने से कतराते हैं, क्योंकि यहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल है।

बीमार पड़ना मतलब मौत से जंग

सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। कई बार बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को खाट पर लादकर कई किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।

वोट देने के लिए भी 20 किमी सफर

ग्रामीणों ने बताया कि उनके टोले में मतदान केंद्र नहीं है। वोट देने के लिए भी करीब 20 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

अधिकारियों को भी दिखी सच्चाई

मिली जानकारी के अनुसार जब जिला अधिकारी अस्पताल निर्माण का जायजा लेने पहुंचे, तो घाटी में उनकी गाड़ी खराब हो गई थी। इससे गांव की सड़क व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ गई।

मुखिया ने भी मानी समस्या

ओरसा पंचायत की मुखिया अमृता देवी ने कहा कि
“जामडीह गांव में सड़क की समस्या काफी पुरानी है। पंचायत स्तर से कई बार इस मुद्दे को उठाया गया है। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए संबंधित विभाग को सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द इस दिशा में पहल होगी।”

ग्रामीणों का ऐलान – “सड़क नहीं तो वोट नहीं”

लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक जामडीह गांव में पक्की सड़क नहीं बनेगी, तब तक हम वोट नहीं देंगे।

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