2 महीने में थाना प्रभारी का ट्रांसफर: हाईकोर्ट सख्त, आदेश पर लगी रोक
ब्रेकिंग न्यूज़ सिंगरौली ब्यूरो चीफ दिनेश तिवारी

2 महीने में थाना प्रभारी का ट्रांसफर: हाईकोर्ट सख्त, आदेश पर लगी रोक
मोरवा में ही रहेंगे कपूर त्रिपाठी, अगली सुनवाई 8 अप्रैल को
सिंगरौली / जबलपुर।
सिंगरौली जिले के मोरवा थाना प्रभारी कपूर त्रिपाठी के अचानक हुए ट्रांसफर मामले में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। महज दो महीने के भीतर किए गए स्थानांतरण को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए फिलहाल ट्रांसफर आदेश पर रोक (स्टे) लगा दी है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, कपूर त्रिपाठी को 12 जनवरी 2026 को मोरवा थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ किया गया था। लेकिन इसके बाद 26 मार्च 2026 को उनका ट्रांसफर आदेश जारी कर दिया गया।
इस तरह महज 2 महीने के भीतर ही उनका स्थानांतरण कर दिया गया, जो कि सामान्य प्रशासनिक नियमों के विपरीत माना जा रहा है। नियम के अनुसार, थाना प्रभारी स्तर के अधिकारियों को कम से कम 2 वर्ष का कार्यकाल दिया जाना चाहिए।
ट्रांसफर पर उठे सवाल
इस अचानक हुए ट्रांसफर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया गया?
क्या ट्रांसफर के पीछे कोई ठोस कारण था?
या फिर यह फैसला नियमों को नजरअंदाज कर लिया गया?
इन सभी बिंदुओं को लेकर मामला अदालत पहुंचा।
याचिकाकर्ता का पक्ष
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश की गईं।
यह ट्रांसफर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ‘Prakash Singh vs Union of India’ के खिलाफ है
राज्य सरकार की ट्रांसफर नीति का उल्लंघन किया गया है
ट्रांसफर आदेश में किसी भी प्रकार का ठोस या वैध कारण दर्ज नहीं है
इन तर्कों के आधार पर ट्रांसफर आदेश को चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि:
थाना प्रभारी स्तर के अधिकारियों को कम से कम 2 साल का कार्यकाल मिलना चाहिए
समय से पहले ट्रांसफर केवल विशेष परिस्थितियों में ही संभव है
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफर तभी किया जा सकता है जब:
कोई गंभीर अनुशासनात्मक मामला हो
भ्रष्टाचार या आपराधिक आरोप हों
या कोई विशेष प्रशासनिक आवश्यकता हो
लेकिन इस मामले में ट्रांसफर आदेश में ऐसे किसी कारण का उल्लेख नहीं पाया गया।
सरकार को दिए गए निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि:
अगली सुनवाई में पूरी ट्रांसफर फाइल पेश की जाए
पुलिस स्थापना बोर्ड की सिफारिश भी अदालत में प्रस्तुत की जाए
इससे स्पष्ट है कि कोर्ट इस मामले की गहराई से जांच करना चाहता है।
फिलहाल बड़ी राहत
कोर्ट ने 26 मार्च 2026 के ट्रांसफर आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
इसके साथ ही कपूर त्रिपाठी को मोरवा थाना में ही अपना कार्य जारी रखने की अनुमति दे दी गई है।
यह फैसला उनके लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 08 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगली सुनवाई में सरकार क्या जवाब पेश करती है और कोर्ट का अंतिम रुख क्या होता है।




