
25 साल बाद भी नहीं बदली महुआडांड़ प्रखंड की किस्मत, जल-नल योजना फेल; रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य बदहाल
महुआडांड़ लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड बने 25 वर्ष हो गए हैं, लेकिन आज भी यह क्षेत्र विकास से कोसों दूर नजर आता है। आकांक्षी प्रखंड का दर्जा मिलने के बावजूद यहां के ग्रामीण शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।सरकार की जल-नल योजना यहां कागजों तक सीमित नजर आ रही है। कई गांवों में पाइपलाइन बिछाई गई और पानी की टंकियां भी बनाई गईं, लेकिन नलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। गर्मी बढ़ते ही हालात और खराब हो गए हैं। ग्रामीणों को दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोना पड़ रहा है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।शिक्षा व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। महुआडांड़ में अब तक सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापना नहीं हो सकी है। प्रखंड में कॉलेज होने के बावजूद अधिक फीस के कारण सैकड़ों गरीब विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। आर्थिक तंगी के कारण कई छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।वहीं रोजगार के साधनों का भी भारी अभाव है। हर दिन दर्जनों ग्रामीण रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान रोजगार और विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद स्थिति जस की तस बनी रहती है।स्वास्थ्य व्यवस्था भी बदहाल हैसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महुआडांड़ में डॉक्टरों की भारी कमी है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों में रेफर किया जाता है। महुआडांड़ प्रखंडवासियों ने स्थानीय सांसद कालीचरण सिंह, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह एवं लातेहार जिले के उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता से उचित न्याय की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने जल्द बुनियादी सुविधाएं बहाल करने की मांग की है, ताकि महुआडांड़ प्रखंड भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।




