
महुआडांड़ (लातेहार):झारखंड में विकास के नाम पर हो रहे दावों की सच्चाई अगर देखनी हो, तो महुआडांड़ प्रखंड के हामी पंचायत स्थित बेरा पहाड़ गांव की हालत देख लीजिए। यहां हालात इतने बदतर हैं कि यह गांव सीधे तौर पर सरकारी सिस्टम की नाकामी और लापरवाही की पोल खोल रहा है। गांव के लोग आज भी बदहाल और उपेक्षित जिंदगी जीने को मजबूर हैं। बरसात आते ही यह गांव पूरी तरह दुनिया से कट जाता है। बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना किसी खतरे से कम नहीं, और रात होते ही पूरा गांव घुप अंधेरे में डूब जाता है। यह हालात किसी पिछड़े युग की याद दिलाते हैं, न कि आज के “विकासशील” भारत की।ग्रामीणों का साफ कहना है कि सरकार की योजनाएं सिर्फ फाइलों और कागजों तक सीमित हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जरूरी योजना तक यहां के गरीबों को नसीब नहीं हुई। लोग आज भी टूटे-फूटे झोपड़ों में जिंदगी गुजार रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।सबसे शर्मनाक और चिंताजनक पहलू यह है कि गांव की बदहाली अब सामाजिक अभिशाप बन चुकी है। यहां शादी-ब्याह के रिश्ते तक नहीं आ रहे हैं। युवा पीढ़ी निराश और हताश है, और गांव का भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है।और हद तो तब हो जाती है जब मनिका के विधायक रामचंद्र सिंह गांव का दौरा कर जाते हैं, लेकिन उसके बाद भी जमीनी हकीकत में रत्ती भर बदलाव नहीं आता। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों के दौरे सिर्फ फोटो और दिखावे तक सीमित हैं, असल काम से उनका कोई लेना-देना नहीं प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता भी साफ नजर आती है। आज तक कोई अधिकारी गांव की हालत देखने तक नहीं पहुंचा।




